भारतीय कंपनियां ने अमेरिका से कच्चा तेल आयात 150% तक बढ़ाया

Published Date: 04-08-2025

नई दिल्ली: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद भारत-अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में एक नई गर्मी देखने को मिल रही है। जनवरी 2025 के बाद से भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया है। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस आयात में 51 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को दर्शाता है।

आंकड़ों में दिख रही तेज बढ़ोतरी– एक रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही भारत ने अमेरिका से तेल खरीदने में अधिक रुचि दिखाई है। पिछले साल जहां भारत अमेरिका से प्रतिदिन 0.18 मिलियन बैरल तेल का आयात कर रहा था, वहीं इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 0.271 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया है। यह तेजी अप्रैल-जून 2025 की तिमाही में और भी स्पष्ट हुई, जब 2024 की इसी तिमाही की तुलना में आयात में 114% का उछाल आया।

आर्थिक आंकड़ों के नजरिए से देखें तो, वित्तीय वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में भारत ने अमेरिका से 1.73 बिलियन डॉलर का तेल आयात किया था। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में यह आंकड़ा दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 3.7 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया। अकेले जुलाई 2025 में भारत का अमेरिकी तेल आयात जून की तुलना में 23% अधिक रहा, जिससे भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 3% से बढ़कर 8% हो गई है। सरकारी सूत्रों का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियां अमेरिका से तेल आयात में 150% तक की वृद्धि कर सकती हैं।

LNG और LPG का आयात भी बढ़ा– कच्चे तेल के अलावा, भारत ने अमेरिका से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का आयात भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। 2024-25 में LNG का आयात 1.41 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2.46 बिलियन डॉलर हो गया है। सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर के एक बड़े LNG कॉन्ट्रैक्ट पर भी बातचीत अग्रिम चरण में है। इस मामले पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी बेहद मजबूत है, जो साझा हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है। ऊर्जा सहयोग अब हमारे द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है।” भारत की यह नीति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अमेरिका के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को और अधिक गहराई देना चाहता है।

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