नई दिल्ली-: नेशनल फेडरेशन ऑफ यूथ मूवमेंट (NFYM) हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक मुस्लिम महिला का नक़ाब खींचे जाने की घटना की कड़ी निंदा करता है।
NFYM के चेयरमैन मसीहुज्ज़ामा अंसारी ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि यह घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि महिला सम्मान और अस्मिता पर गंभीर आघात भी है। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग से इस घटना का तत्काल संज्ञान लेने और मुख्यमंत्री को नोटिस जारी करने की मांग की है।
NFYM चेयरमैन ने कहा है कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों से गरिमा, संवेदनशीलता और जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा की जाती है। इस प्रकार की घटनाएँ लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और सामाजिक शालीनता के पूर्णतः विपरीत हैं।
उन्होंने कहा कि इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कुछ लोगों द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया जा रहा है। यदि ऐसा है तो उन्हें संवैधानिक पद से या सार्वजनिक सभाओं से बचना चाहिए। मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का तर्क किसी भी प्रकार के अनुचित आचरण या कृत्य के बचाव का आधार नहीं बन सकता।
NFYM, राष्ट्रीय महिला आयोग से विशेष आग्रह करता है कि वह इस घटना को महिला अस्मिता पर हमले के रूप में देखते हुए इसकी गंभीरता को समझे और बिना किसी भेदभाव के उचित कार्रवाई सुनिश्चित करे।
NFYM स्पष्ट करता है कि महिलाओं के सम्मान, गरिमा और अधिकारों को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
साथ ही, इस विषय को भी अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए कि बीते कुछ वर्षों में मुसलमानों, अन्य अल्पसंख्यक वर्गों, कमजोर तबकों और हाशिये पर खड़े समुदायों के खिलाफ लगातार ऐसी अनेक घटनाएँ सामने आई हैं। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के साथ-चाहे वह शैक्षणिक संस्थानों में हों या समाज के अन्य क्षेत्रों में-इस प्रकार के मामलों का बढ़ना चिंता का विषय है।
इन घटनाओं के संदर्भ में बार-बार मानसिक असंतुलन का तर्क सामने लाया जाता है। किंतु ऐसे अपराधों में मानसिक बीमारी को ढाल बनाकर न्यायिक और सामाजिक उत्तरदायित्व से बचना न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों दोनों के लिए घातक है।
यदि कोई व्यक्ति वास्तव में मानसिक रूप से कमजोर है, तो उसे किसी भी प्रकार के सार्वजनिक या संवैधानिक पद पर आसीन नहीं किया जाना चाहिए। मानसिक रूप से असंतुलित व्यक्ति का सार्वजनिक दायित्व निभाना न तो उचित है और न ही स्वीकार्य।
सुल्ली डील्स और बुल्ली बाई ऐप द्वारा चर्चित मुस्लिम महिलाओं की ऑनलाइन नीलामी करने वाले अपराधियों के प्रति भी क़ानून व्यवस्था ने नर्म रुख़ अपनाया और उनके करियर का हवाला देकर और “पिता तुल्य” रवैया अपनाने की बात कह कर ज़मानत दे दिया गया था।
इसी प्रकार, 31 जुलाई 2023 को जयपुर से मुंबई जा रही एक सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन में आरपीएफ के एक कांस्टेबल द्वारा तीन मुसलमानों की हत्या की घटना भी हमारे सामने है, जिसमें बाद में बचाव के तौर पर मानसिक बीमारी का हवाला दिया गया।
NFYM का मानना है कि इस प्रकार की घटनाओं को व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक और संस्थागत जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए, और दोषियों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के क़ानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
नेशनल फेडरेशन ऑफ यूथ मूवमेंट (NFYM) (जारीकर्ता)


