ख़ुमार देहलवी के जश्न में हुआ कुल हिंद मुशाइरा

Published Date: 02-07-2025

मय्यत में अपने बाप की बेटा नहीं गया, वो देखना पड़ा है जो देखा नहीं गया !

नई दिल्ली। मारूफ उस्ताद शायर ख़ुमार देहलवी के यौमे-पैदाइश पर जश्न-ए-ख़ुमार देहलवी के नाम से अंजुमन मैग्यार-ए-अदब दिल्ली के जैर-ए-एहतमाम तेज़ स्टूडियो न्यू अशोक नगर दिल्ली में कुल हिंद मुशाइरे का इंएक़ाद किया गया जिसमें मुक़ामी और मेहमान शोअरा-व-शायरात ने शिरकत की साथ ही सामईन की कसीर तादाद इस तारीख साज़ मुशायरे की ज़बरदस्त कामयाबी की शाहिद रही! 

जश्न-ए-ख़ुमार देहलवी मुशायरे की सदारत ख़ुमार देहलवी के उस्ताद-ए-मोहतरम आली मर्तबत शमीम ज़मीरी सरधन्वी साहिब ने और निज़मत हामिद अली अख़्तर ने की। ऐजाज़ अंसारी (दिल्ली), डॉ. कमाल अख़्तर बदायूनी (लखनऊ), डॉ. अशोक मधुप (दिल्ली), चाँद ख़ाँ चाँद (विदिशा भोपाल (म.प्र.), पैकर पानीपती (पानीपत), बाबू अली अब्र (दिल्ली), शकील ख़ान साग़र (लखीमपुर), इक़बाल अकरम वारसी (लखीमपुर) और डॉ. ख़ुर्रम नूर (दिल्ली) ने मेहमान-ए-ख़ुसूसी की हैसियत से शिरकत की!

मुशायरे के संयोजक पंडित प्रेम बरेलवी और सह-संयोजक माजिद अली ख़ाँ माजिद, शादाब हया व सुप्रिया सिंह वीणा रहे। तेज़ मीडिया और वी-स्क्वायर एंटरटेनमेंट ने मीडिया पार्टनर का फ़र्ज़ बख़ूबी अंजाम दिया। आर.सी. जैन (समाजसेवी) ने भी अपनी मौजूदगी से जश्न-ए-ख़ुमार देहल्वी को रौनक बख़्शी!। 

जश्न-ए-ख़ुमार देहलवी के मौक़े पर मेहमान-ए-ख़ुसूसी ऐजाज़ अंसारी ने अपनी राय का इज़हार करते हुए कहा कि बहुत मुबारक है ये दिन और ये महफ़िल क्यूंकि आज इस ख़ूबसूरत महफ़िल में तीन पीढ़ियाँ एक साथ मौजूद हैं ख़ुमार देहल्वी के उस्ताद शमीम ज़मीरी सरधन्वी और ख़ुमार देहलवी के शागिर्द पंडित प्रेम बरेलवी जलवा अफ़रोज़ हैं। मज़ीद ये कि ऐसे मौक़े कम ही देखने को मिलते हैं!

नाज़िम-ए-मुशाइरा हामिद अली अख़्तर ने दौरान-ए-निज़ामत कहा कि अक्सर लोग लोगों की वफ़ात के बाद उनके नाम से मंसूब जश्न या महफ़िलें मुनअक़िद करते हैं। लेकिन आज एक निहायत उम्दा बात ये देखने को मिली कि ख़ुमार के जाँनशीन पंडित प्रेम बरेलवी के साथ-साथ ख़ुमार देहलवी के शागिर्दान ख़ुमार के जीते जी इनकी मौजूदगी में इनका जश्न मना रहे हैं। ये लम्हा बहत सुकून बख़्श है।

अहले-ज़ौक़ क़ाराईन के लिए मुशायरे में पढ़े गये अश्आर दर्ज-ए-ज़ेल हैं :-

हालात-ए-हाज़िरा ने परेशान यूँ किया, 

नाराज़ मुझ से हो गईं नींदें सुकून की।

 – शमीम ज़मीरी सरधन्वी

दुनिया को फेसबुक ने शिकंजे में ले लिया

दरिया तमाम छोटे से कूज़े में ले लिया!

  -ख़ुमार देहलवी

अरे ओ ज़माने प इतराने वाले, 

नहीं साथ देता किसी का ज़माना।

 -हामिद अली अख़्तर

तमाम शहर से मैं जंग जीत सकता हूँ, 

मगर मैं तुम से बिछड़ते ही हार जाऊँगा।

 -ऐजाज़ अंसारी

इख़्तिलाफ़ात को जो लोग हवा देते हैं, 

वो ज़माने के लिये काम बढ़ा देते हैं।

-डॉ. कमाल अख़्तर बदायूनी

जिस जानिब से सर पर मेरे, आकर के पत्थर निकले। 

मुड़कर देखा जब मैंने तो यारों ही के घर निकले।।

 –डॉ. अशोक मधुप

साक़ी न ख़ुम न बादा-ए-गुल्फ़ाम चाहिए।

मुझको निगाहे-नाज़ का इक जाम चाहिए।। 

 -चाँद ख़ाँ ‘चाँद’

किसी ने खिड़की से चेहरा निकाल रक्खा है।

फ़लक के चाँद को मुश्किल में डाल रक्खा है।। 

-पैकर पानीपती

उंगलियाँ, ग़ैर के लुक़्मों प उठाने वाले, 

तूने देखा है कभी अपने निवालों की तरफ़।

 -इक़बाल अकरम वारसी

किचन से आया था बेलन जो सनसनाता हुआ।

हमारा माथा रहा घण्टों झनझनाता हुआ ।।

 -बाबू अली अब्र

कारीगरी कमाल है तेरी मेरे ख़ुदा,

ज़ाहिर हुए बग़ैर ही क्या-क्या बना दिया।

 – -पंडित प्रेम बरेलवी

नफ़रत का बोलबाला हर इक सम्त है मगर,

उलफ़त का साज़ फिर भी बजाया तो जाएगा।

-माजिद अली ख़ाँ माजिद

देखना ये है कि अंजाम निकलता क्या है,

इश्क़ की पहले शुरुआत तो हो जाने दो।

-मुहम्मद शादाब हया ककरोल्वी

सहारा ढूँढ मत ऐ दिल, सहारा मार डालेगा।

भँवर से बच भी निकाला तो किनारा मार डालेगा।।

 -सुप्रिया सिंह वीणा

तुमने नज़र मिलाने से पहले ही फेर ली, 

गोया मेरे फ़साने का उनवाँ नहीं रहा।

 -जावेद अब्बासी

अदब की हों बातें अदब हो महफ़िल 

अदब कर रहें हैं अदब चाहते हैं 

  -असलम बेताब

तिरा ख़याळ कि मुझ-सा नहीं है दुनिया में

किसी भी दिन तुझे ख़तरे में डाल सकता है 

 -रामश्याम हसीन

मुझे खुश देखने के वास्ते हर दुख उठाती थी ,

मेरा दुख देख कर माँ अपने दुख को भूल जाती है!

 सिराज देहलवी (ओ.पी.अग्रवाल)

वो सिर प ख़त़रों को ख़ुद अपने मोल लेती है।

जो नाव दरिया में ज़्यादा ही झोल लेती है।।

गुल बहार ‘गुल’

ऐसा न हो दुनिया तुम्हें दीवाना समझ ले, 

दीवाना तो दीवाना है समझाना समझ कर! 

 नईम बदायूनी

नफ़रत ओ बुग़्ज़ ओ हसद दिल को जला देते हैं 

कश्ती में आप मुहब्बत की सफ़र कर देखो 

संगीता चौहान ‘सदफ़’

छोटे बच्चों को ज़रूरी है नसीहत लेकिन, 

अपना दामन भी गुनाहों से बचाया जाए।

 नईम हिंदुस्तानी

हम हर दिन का शबनमी सहर से आगाज़ करते हैं।

वो हर रात का साज़ सरे शाम से नाराज़ करते हैं।।

  –   इंजीनियर महेंद्र

इनके अलावा नईम बदायूनी, नईम हिंदुस्तानी, इंजीनियर महेन्द्र शायर, संगीता चौहान सदफ़, गुल बहार गुल, हिदायत हुसैन,ताबिश ख़ैराबादी, वसीम जहांगीराबादी, वसीम झिंझानवी, मलिक रिज़वान, मेहबूब अमीन, हाशिम देहलवी और अंसार अहमद ने भी अपने अश्आर से लोगों के दिल जीते। मुशाइरा तक़रीबन 7 घंटों तक जारी रहकर 7-30 शाम इख़्तिताम पज़ीर हुआ। अंत मैं मुशायरे के संयोजक पंडित प्रेम बरेलवी ने सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया।

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