भारत में हाल में हुई चार्टर उड़ानों की घटनाएँ — महाराष्ट्र के बारामती और झारखंड के सिमरिया के पास छोटे विमानों के दो हादसे, और अंडमान में एक हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग — यह स्पष्ट कर देती हैं कि गैर-निर्धारित विमानन को हाशिये का क्षेत्र नहीं माना जा सकता। चार्टर उड़ानें अब केवल अमीरों की विशेष सुविधा नहीं रहीं। वे नागरिक उड्डयन का तेजी से बढ़ता हिस्सा हैं और इन्हें भी निर्धारित एयरलाइनों की तरह ही कठोरता, पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है।
30 सितंबर 2025 तक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की सूची में 133 गैर-निर्धारित ऑपरेटर दर्ज थे। साफ है कि वृद्धि, निगरानी से आगे निकल गई है। 24 फरवरी को परमिट धारकों के साथ नियामक की बैठक देर से सही, पर आवश्यक थी। सुरक्षा प्रदर्शन के आधार पर ऑपरेटरों की रैंकिंग और विमान की आयु, रखरखाव इतिहास तथा पायलट अनुभव का खुलासा अनिवार्य करने की योजना पारदर्शिता बढ़ा सकती है। यह चेतावनी भी महत्वपूर्ण है कि चाहे वीआईपी कार्यक्रमों का दबाव हो या कारोबारी मांगें, व्यावसायिक दबाव कभी भी सुरक्षा पर भारी नहीं पड़ने चाहिए।
रखरखाव मानकों पर कड़ी निगरानी, विशेषकर उन ऑपरेटरों में जो अपनी स्वयं की सुविधाएँ चलाते हैं, समयोचित कदम है। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की ऑडिट, ईंधन अभिलेखों और ADS-B डेटा की जांच, तथा उड़ान-ड्यूटी समय सीमा का सख्ती से पालन — ये सभी विवेकपूर्ण उपाय हैं। प्रणालीगत चूकों के लिए वरिष्ठ प्रबंधकों को जवाबदेह ठहराना, केवल पायलटों को दोष देने से आगे बढ़कर संस्थागत जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बदलाव है।
अतीत चेतावनी देता है। 2009 में आंध्र प्रदेश में बेल 430 हेलिकॉप्टर दुर्घटना और 2001 में बीचक्राफ्ट किंग एयर हादसा, जिसमें वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं की मृत्यु हुई, खराब मौसम से प्रभावित थे। मौसम जागरूकता और सीमित नियंत्रण वाले वातावरण में निर्णय-क्षमता पर नियमित प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। फिर भी कमजोरियाँ बनी हुई हैं — आसमान सुरक्षा रिकॉर्ड, टाइप-रेटेड अनुभव की कमी, सीमित सिम्युलेटर और प्रशिक्षक, तथा नियामक विभागों में स्टाफ की कमी।
गैर-निर्धारित संचालन पर “गहन अध्ययन” का वादा स्वागतयोग्य है। लेकिन केवल अध्ययन दुर्घटनाएँ नहीं रोकते; निरंतर और सख्त प्रवर्तन ही उन्हें रोकता है। यदि चार्टर विमान को सुरक्षित रूप से परिपक्व होना है, तो भारत को छिटपुट कार्रवाई की जगह स्थायी निगरानी और कठोर पारदर्शिता को अपनाना होगा।


